रूरल मैनेजमेंट में करियर (Career in Rural Management)

रूरल डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम करने के लिए यह भी जरूरी है कि आप लोगों के प्रति समर्पण और सेवा का भाव रखें। आप में अपनी बातों से लोगों को प्रभावित करने की क्षमता हो। समाज के लिए कुछ कर गुजरने का ज़ज़्बा भी होना चाहिए। ग्रामीण विकास का क्षेत्र बहुत विस्तृत है, ऐसे में पहले आपको सुनिश्चित करना होगा कि आप टीचिंग, रिसर्च या फील्ड वर्क में से कहां जाना पसंद करेंगे। आप जिस भी क्षेत्र का चुनाव करें, पूरे मन से, समाज की भलाई के लिए और तत्परता से काम करें। अपनी क्षमताओं और योग्यताओं का अपने काम के समय इस्तेमाल करें, तभी आप रूरल मैनेजमेंट में करियर बना पाएंगे। आज देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थान रूरल डेवलपमेंट में प्रोफेशनल कोर्स करा रहे हैं, जिसके चलते देश में प्रशिक्षित रूरल डेवलपमेंट प्रोफेशनल्स बड़ी संख्या में तैयार हो रहे हैं। रूरल डेवलपमेंट को प्रोफेशनल कोर्स के तहत माना जाता है। इस क्षेत्र में सबसे अधिक आपकी स्किल्स और रुचियां मायने रखती हैं। रूरल डेवलपमेंट के क्षेत्र में जैसे-जैसे आपका अनुभव बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे आप तरक्की करने लगते हैं।

ग्रामीण विकास से संबंधित कोर्स हमेशा से ही लोगों की पसंद रहे हैं। इन कोर्सेज में छात्रों की बड़ी संख्या इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में भी इनकी मांग कम नहीं होगी। इन्हीं में से एक है रूरल मैनेजमेंट। इस कोर्स के बारे में बता रही हैं  भारत को गाँवों का देश कहा जाता है। कोई भी विकास कार्यक्रम इन गाँवों को ध्यान में रखे बिना तैयार नहीं किया जा सकता। ग्रामीण विकास का सीधा संबंध देश की अर्थव्यवस्था से है। जब तक यहां के लोग शिक्षित और आर्थिक रूप से सम्पन्न नहीं होंगे, तब तक देश का विकास संभव नहीं। पिछले कुछ वर्षों से गाँवों का परिदृश्य इतनी तेजी से बदला है कि वहां पर भी शहरों की तरह विकास-प्रक्रिया की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है। देखा जाए तो विकास एजेंसियों के लिए ग्रामीण विकास एक मिशन बनता जा रहा है। इस लिहाज से वे अपने कार्यक्रमों में तरह-तरह के बदलाव भी ला रही हैं। प्राइवेट सेक्टर भी इसमें अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे ग्रेजुएशन कर चुके छात्रों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खुले हैं। ग्रामीण विकास से जुड़े प्रोफेशन की खास बात यह है कि इसमें अच्छी आमदनी के साथ-साथ समाज सेवा का भी अवसर मिलता है। इस सिलसिले में सरकार ने कई गैर सरकारी संगठनों को धन मुहैया करवाया है, ताकि वे ग्रामीण क्षेत्रों का विकास कर सकें और गरीबी, अशिक्षा, स्वास्थ्य समस्या, आर्थिक कठिनाइयों, महिलाओं की समस्याएं आदि विषयों के बारे में लोगों को जागरूक कर सकें।

क्या काम है रूरल मैनेजर का?

ग्रामीण विकास कार्यक्रमों को सही तरीके से लागू कराने की जिम्मेदारी रूरल मैनेजरों की होती है। इसके लिए प्रोफेशनल्स को कई ग्रामीण संगठनों एवं संस्थानों की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। उन्हें लोगों की परेशानी और वहां की संस्कृति को समझने, प्रोजेक्ट व प्लान को लागू करने, परंपरागत बाजार को परखते हुए अन्य विभागों से तालमेल बिठाने की जरूरत होती है।

स्नातकों के लिए अपार संभावनाएं-

इस क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए पाठ्यक्रम की जो रूपरेखा तय की गई है, उसके लिए ग्रेजुएट होना आवश्यक है। कई संस्थानों ने प्रवेश परीक्षा में पात्रता के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक की सीमा भी रखी है। इसमें प्रवेश परीक्षा के आधार पर ही दाखिला मिल सकता है। प्रवेश परीक्षा एक तरह से स्क्रीनिंग परीक्षा होती है, इसके बाद अगला चरण इंटरव्यू का होता है।

जागरूकता के लिए-

ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के विकास के लिए उन्हें जागरूक बनाना आवश्यक है। सरकार और अन्य संबंधित एजेंसियों का मानना है कि अगर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को सही ढंग से प्रशिक्षित किया जाए तो उनमें आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। संभव है कि शहरों की तरफ उनका पलायन भी कम हो जाए। ग्रामीण विकास से भारतीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। कई ऐसे क्षेत्र (एग्रीकल्चर, हैंडीक्राफ्ट, फिशरीज, पोल्ट्री एवं डेयरी आदि) हैं, जो इसमें सहायक हो सकते हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद लगभग हर सरकार ने इन बिन्दुओं पर अपना ध्यान केंद्रित किया है, परन्तु उनसे जुड़ी योजनाएं सही रूप में जनता तक नहीं पहुंच रहीं। फिर भी हर पंचवर्षीय योजना में ग्रामीण विकास को प्राथमिकता दी जाती है। आज कई कंपनियां प्रमुखता से ग्रामीण क्षेत्रों में सेटअप लगा रही हैं।

क्या काम है रूरल मैनेजर का?

ग्रामीण विकास कार्यक्रमों को सही तरीके से लागू कराने की जिम्मेदारी रूरल मैनेजरों की होती है। इसके लिए प्रोफेशनल्स को कई ग्रामीण संगठनों एवं संस्थानों की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। उन्हें लोगों की परेशानी और वहां की संस्कृति को समझने, प्रोजेक्ट व प्लान को लागू करने, परंपरागत बाजार को परखते हुए अन्य विभागों से तालमेल बिठाने की जरूरत होती है।

रूरल मैनेजमेंट में करियर के लिए कोर्सेज जो की प्रमुख हैं :

  • रूरल मैनेजमेंट में एमबीए
  • मास्टर ऑफ रूरल डेवलपमेंट मैनेजमेंट
  • बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजमेंट में पीजी डिप्लोमा
  • रूरल मैनेजमेंट में पीजी डिप्लोमा
  • रूरल मार्केटिंग में पीजी डिप्लोमा
  • बैचलर ऑफ रूरल टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट
  • रूरल मैनेजमेंट में फेलो प्रोग्राम
रूरल मैनेजमेंट क्या है?

ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए रूरल मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की जरूरत पड़ती है। इसके अंतर्गत ग्रामीण विकास के कार्यक्रमों को सही ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी रूरल मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की होती है। गांवों से शहरों की तरफ लगातार हो रहे पलायन की वजह से ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था में बदलाव आ रहे है। ऐसे लोगों के लिए रोजगार की संभावनाएं उपलब्ध कराने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में वैज्ञानिक तरीके से योगदान देना एक रूरल मैनेजमेंट प्रोफेशनल का काम होता है।

रूरल मैनेजमेंट में कोर्स करने के लिए जरूरी योग्यता:-

अगर आप रूरल मैनेजमेंट में कोर्स करना चाहते रूरल मैनेजमेंट में करियर चाहते है तो आप बैचलर डिग्री के बाद इस फील्ड से जुड़े कोर्स कर सकते है। किसी भी स्ट्रीम से ग्रेजुएशन करने वाले छात्र रूरल मैनेजमेंट के मास्टर और पीजी डिप्लोमा कोर्सेस में एडमिशन ले सकते है। रूरल मैनेजमेंट के कोर्स में प्रवेश के लिए एंट्रेंस एग्जाम देना होता है। कॉमन एडमिशन टेस्ट के स्कोर के आधार पर कई सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में प्रवेश लिया जा सकता है।

कोर्स करने के बाद यहां मिलेगी नौकरी:-

रूरल मैनेजमेंट में कोर्स करने के बाद छात्रों के लिए कई अवसर मौजूद है। कई सरकारी विकास एजेंसियां, गैर-सरकारी संगठन, कॉर्पोरेट सेक्टर की सामाजिक विकास यूनिट, राज्य संसाधन केंद्र आदि में आसानी से जॉब मिल सकती है। इसके अलावा छात्र फ्रीलासिंग या पार्ट टाइम के रूप में समाज सेवा करके भी अच्छा पैसा कमा सकते है। ऐसे हजारों एनजीओ है जो ग्रामीण विकास के लिए काम करते है ये लोग रूरल मैनेजमेंट प्रोफेशनल को अच्छे पैकेज के साथ नौकरी पर रखते है। इन एनजीओ में रूरल मैनेजमेंट प्रोफेशनल को ट्रेनर, रिसर्चर, कंसल्टेंट, प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर, प्रोजेक्ट डायरेक्टर आदि के रूप में काम मिलता है। इसके अलावा कई अंतर्राष्ट्रीय एनजीओ और संयुक्त राष्ट्र की विकास एजेंसियां है जो रूरल मैनेजमेंट प्रोफेशनल को जॉब देती है। अगर आप चाहें तो खुद का एनजीओ शुरू करके भी अच्छा करियर बना सकते है।

जान ने योग्य अन्य बातें:-

टीचिंग में आप किसी संस्थान या यूनिवर्सिटी में जाकर रूरल डेवलपमेंट पढ़ा सकते हैं। प्रैक्टिस के दौरान आप ग्रामीण लोगों के साथ मेल-जोल बढ़ाकर अपना काम कर सकते हैं या फिर आप पॉलिसी प्रैक्टिस में ग्रामीणों के लिए बनाई गई नीतियों में कमियां, खूबियां, आरटीआई इत्यादि में ग्रामीण लोगों को जागरूक कर, उनको दी जा रही सुविधाओं को बताने जैसे कार्य कर सकते हैं।

ग्रामीण लोगों के रहन-सहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायतें, अल्पसंख्यक, रोजगार, सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन उनमें बदलाव, उनकी कमियों को कम करने, उनका लाभ उठाने और लोगों को जागरूक करने आदि क्षेत्रों में काम किया जा सकता है। रूरल डेवलपमेंट के क्षेत्र में आपकी सेलरी आपके अनुभव और काम करने की क्षमता के साथ ही आप किस संस्थान के साथ काम करने जा रहे हैं, इस पर निर्भर करती है जो 15 हजार से 65 हजार तक हो सकती है।

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Date: 12 Apr 2019

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