Career option After 12th Commerce in Hindi (कॉमर्स से 12वीं के बाद करियर विकल्प)

 

कॉमर्स स्ट्रीम वाले 11 वीं और 12 वीं के छात्रों के लिए करियर परामर्श:

हर बार हर एक स्टूडेंट्स का ये कन्फूशन होता है की वो कौन सा कोर्स चुनेगा या चुनेगी? कई बार स्टूडेंट का इंटरेस्ट भी मैटर करता है की किस कोर्स को चुन ने वह इच्छुक है क्योंकि हर स्टूडेंट को पता होता ही है की वो कितना सक्षम है वास्तव में, जब प्रोफेशनल कोर्सेज की बात आती है, तो छात्रों को उपलब्ध कई प्रोफेशनल करियर विकल्पों सहित सूची में शीर्ष पर कॉमर्स अवश्य दिखाई देता है.

इसलिए, यदि आप अपने हाईस्कूल के दौरान कॉमर्स स्ट्रीम लेने पर विचार कर रहे हैं, तो आपको अंतिम निर्णय लेने से पहले इससे जुड़े कुछ पहलुओं को अवश्य देखना चाहिए. आपकी मदद करने के लिए, प्रमुख विषयों और डोमेन समेत कॉमर्स स्ट्रीम के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी और विवरण, आगे का अध्ययन क्षेत्र और करियर के अवसर आदि को नीचे सूचीबद्ध किया गया है.

मुख्य विषय / सब-डोमेन:

कॉमर्स स्ट्रीम्स से जुड़े पूर्वाग्रह के बावजूद भी पिछले कुछ दशक से इस विषय की लोकप्रियता बहुत तेजी से बढ़ रही है. बढ़ती अर्थव्यवस्था,प्रोफेशनल करियर का सुनहरा अवसर तथा उच्च स्कोरिंग की वजह से हाई स्कूल या उसके बाद इस सब्जेक्ट को लेने की प्रवृति छात्रों में बढ़ी है. पहले यह स्ट्रीम अकाउंटेंसी और अर्थशास्त्र से संबंधित कुछ विषयों तक ही सीमित था लेकिन आज इसके अंतर्गत कई विषयों का अध्ययन किया जा रहा है. उनमें से कुछ हैं -

अर्थशास्त्र (इकोनोमिक्स):

एक कॉमर्स स्ट्रीम वाले छात्र को कई वित्तीय और आर्थिक अवधारणाओं से रूबरू होना पड़ता है.11 वीं तथा 12 वीं कक्षा के दौरान छात्रों को मुखतः अर्थशास्त्र, भारतीय आर्थिक विकास, सांख्यिकी, सूक्ष्म अर्थशास्त्र और सृष्टि अर्थशास्त्र आदि का अध्ययन छात्रों को करना होता.इसके अतिरिक्त  अर्थशास्त्र में बहुत अच्छा करने के लिए इस विषय की एक वैचारिक समझ विकसित करना और समस्याओं और न्यूमेरिकल्स का अभ्यास करना बहुत जरुरी होता है.

अंग्रेज़ी:

प्रत्येक स्ट्रीम की तरह कॉमर्स स्ट्रीम में भी एक अनिवार्य भाषा के रूप में अंग्रेजी विषय को पढ़ना पड़ता है. कॉमर्स स्ट्रीम में जो अंग्रेजी छात्र सीखते हैं वह अन्य स्ट्रीम्स के अंग्रेजी से काफी अलग होता है तथा उसमें मुख्य रूप से व्याकरण, वाक्यविन्यास और शब्दावली विकास सहित भाषा की मूलभूत बातें पर ध्यान केंद्रित करना होता है. इसके अलावा छात्र बिजनेस कम्युनिकेशन और अन्य पहलुओं को भी सीखते हैं.

अकाउंटेंसी (लेखाकर्म):

अकाउंटेंसी कॉमर्स स्ट्रीम का एक  मुख्य विषय है और यह हाईस्कूल शिक्षा के दौरान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह विषय अकाउंटेंसी की मूलभूत बातें और इसकी सैद्धांतिक प्रक्रिया और फायनेंसियल एकाउंटेंसी, लेखा मानक अकाउंटिंग स्टैण्डर्ड, जीएसटी, व्यापार लेनदेन की रिकॉर्डिंग और इसी तरह के 11 वीं के कॉन्सेप्ट पर फोकस करता है. कक्षा 12 वीं में छात्रों को गैर-लाभकारी संगठनों के लिए एकाउंटेंसी,पार्टनरशिप फर्म्स,कम्पनियों के नकद प्रवाह विवरण और वित्तीय विवरणों का विश्लेषण तथा कंप्यूटराइज अकाउंटिंग का अध्ययन करना पड़ता है.

बिजनेस स्टडीज / ऑर्गेनाइजेशन ऑफ कॉमर्स:

बिजनेस स्टडीज या कॉमर्स ऑर्गेनाइजेशन हाई स्कूल के दौरान कॉमर्स स्टूडेंट्स के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय होता है. 11 वी कक्षा में इस विषय के अंतर्गत व्यावसायिक संगठनों के प्रकार, उभरते व्यावसायिक मॉडल, इंडस्ट्री के प्रकार, सामाजिक जिम्मेदारी और बिजनेस एथिक्स, व्यापार वित्त के स्रोत, छोटे व्यवसाय, आंतरिक व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की प्रकृति और उद्देश्य आदि का अध्ययन किया जाता है. कक्षा 12 वीं में मैनेजमेंट प्रिंसिपल्स,बिजनेस एनवायरमेंट,प्लानिंग, स्टाफिंग, ऑर्गेनाइजेशन,  कंट्रोल, फायनांस मार्केट, फायनेंसियल मैनेजमेंट, मार्केटिंग मैनेजमेंट और उपभोक्ता संरक्षण आदि का गहन अध्ययन करना पड़ता है.

मैथमेटिक्स:

मैथमेटिक्स कॉमर्स स्ट्रीम के छात्रों के लिए एक वैकल्पिक विषय होता है लेकिन यदि छात्र कोर एकाउंटेंसी या इसी तरह के डोमेन में करियर बनाना चाहते हैं तो यह बहुत महत्वपूर्ण है. कॉमर्स स्ट्रीम के मैथ्स में रिलेशंस एंड फंक्शन्स,अलजबरा,कैलकुलस, लाइनर,प्रोग्रामिंग,प्रोबेबिलिटी,वेक्टर और मैट्रिक्स का अध्ययन किया जाता है.

इन्फॉर्मेशन प्रैक्टिसेज

इन्फॉर्मेशन प्रैक्टिसेज कॉमर्स स्ट्रीम के छात्रों के लिए एक वैकल्पिक विषय होता है जिसे अपनी रूचि के अनुसार छात्र चुनते हैं. इस सब्जेक्ट में कंप्यूटिंग और डेटाबेस मैनेजमेंट की मूल बातें बताई जाती है. इसके अतिरिक्त इसमें बिजनेस कंप्यूटिंग थियरी, प्रोग्रामिंग और रिलेशनल डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम जैसे विषयों पर फोकस किया जाता है.

कॉस्ट एंड वर्क अकाऊंटैंट :

यह सी.ए. से मिलता-जुलता कोर्स है। द इंस्टीच्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वक्र्स अकाऊंटेंट ऑफ इंडिया कॉस्ट अकाऊंटेंसी का कोर्स कराता है। 12वीं के बाद भी छात्र यह कोर्स कर सकते हैं। इसके लिए 12वीं पास छात्रों को पहले फाऊंडेशन कोर्स पूरा करना होता है। कोर्स पूरा करने के बाद छात्रों को कॉस्ट अकाऊंटैंट और इससे जुड़े पदों पर काम करने का मौका मिलता है।

इसके लिए द इंस्टीच्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वर्क अकाऊंटैंट्स ऑफ इंडिया में आवेदन करना होता है। दाखिले के लिए जून और दिसम्बर में प्रवेश परीक्षा होती है। फाऊंडेशन कोर्स के बाद इंटरमीडिएट कोर्स करना होता है और फिर सी.ए. की तरह ही फाइनल एग्जाम देकर कोर्स पूरा होता है।

बी.कॉम- फाइनांशियल मार्कीट्स :

इसमें फाइनांस, इंवैस्टमैंट्स, स्टॉक मार्कीट, कैपिटल, म्यूचुअल फंड के बारे में जानकारी दी जाती है। इस प्रोग्राम में 6 सिमैस्टर होते हैं और कुल 41 विषयों की पढ़ाई की जाती है इस डिग्री को हासिल करने के बाद ट्रेनी एसोसिएट, फाइनांस ऑफिसर, फाइनांस कंट्रोलर, फाइनांस प्लानर, रिस्क मैनेजमेंट, मनी मार्कीट डीलर इंश्योरैंस मैनेजर की नौकरी मिल सकती है

चार्टर्ड अकाऊंटैंट :

द इंस्टीच्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाऊंटैट ऑफ इंडिया यह कोर्स कराता है। सी.ए. में करियर बनाने के लिए इसकी शुरुआत (कॉमन प्रोफिशिएंसी टैस्ट) से होती है जिसे पास करने के बाद ही छात्र अपने लक्ष्य के पहले पड़ाव को पार कर दूसरे पड़ाव पर पहुंच सकता है इसमें चार विषयों जैसे अकाऊंटिंग, मर्केटाइल लॉ, जनरल इकोनॉमिक्स एवं क्वांटिटेटिव एप्टीच्यूड को शामिल किया जाता है

मान्यता प्राप्त बोर्ड से कॉर्मस स्ट्रीम में 12वीं पास करने के बाद कोई भी छात्र सी.ए. में करियर बना सकता है कई बार छात्र सी.ए. की दौड़ में भाग लेने के लिए अपनी शुरूआत गै्रजुएशन के बाद भी करते हैं लेकिन सी.ए. कोर्स की लंबी अवधि के कारण सी.ए. की शुरुआत का सही समय 12वीं पास करने के बाद का ही होता है इसकी तैयारी के लिए छात्रों को पहले अकाऊंटिंग में मजबूत पकड़ बनानी चाहिए छात्रों में मैनेजमैंट और फाइनांशियल क्षेत्र में एक्सपर्ट नॉलेज के साथ एक्सपर्ट व्यू होना बहुत जरूरी है

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Date: 18 Mar 2019

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